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बाल शोषण जागरूकता के नाम पर दर्जनों संस्थाओं से फ्रॉड; काम करवाने के बाद संचालक फरार

वाराणसी: जिले में संस्था जन चेतना के संचालक वागीश मिश्रा से फ्रॉड की घटना सामने आई है. जहां आईना संस्था के संचालक सुमित श्रीवास्तव ने संस्था जन चेतना के संचालक वागीश मिश्रा के साथ साथ दूसरे कई संस्थाओं को बाल शोषण जागरूकता कार्यक्रम के नाम पर वर्क ऑर्डर जारी किया और काम पूरा होने के पश्चात जब पेमेंट भुगतान की बारी आई तो आईना संस्था संचालक फरार हो गया|

फ्रॉड का शिकार हुए जन चेतना संस्था के संचालक वागीश मिश्रा ने बतया कि “मेरी संस्था जन चेतना ने संस्था आईना संस्था से जून 2022 में बाल शोषण (बाल शोषण) जागरूकता कार्यक्रम किया. यह कार्यक्रम आईना संस्था के कर्ता धर्ता सुमित श्रीवास्तव जो अपना नाम स्वामी जी बताते हैं ने हमें कार्य आदेश के रूप में सौंपा. जो जुलाई 2020 से शुरू हुआ और सितंबर 2020 में हमने बाल शोषण के जागरुकता अभियान को पूर्ण करते हुए अपने कार्य की पूरी फाइल सुमित श्रीवास्तव जी को हैंडओवर किया.

जिसके बाद वादा अनुसर उन्हें हमारे संस्थान को 40 दिन में भुगतान करना था, जो कि 116000 देना था. लेकिन सुमित श्रीवास्तव ने यह भुगतान हमारी संस्था जन चेतना संस्थान को वादा अनुसर समय पर न देते हुए सिर्फ ताल मटोल करते रहे और फिर मार्च 2023 में हमे एक चेक दिया जो 56600 का था जो कि पूरा भुगतान नहीं था.

जब हमने उनसे यह बोला कि हमे बाकी का भुगतान कैसे किया जाएगा या क्यों नहीं मिल रहा तो उन्होंने कहा कि कुछ भुगतान आपको बाद में दे दिया जाएगा . इतना ही नहीं, जब जन चेतना संस्था के संचालक वागीश मिश्रा ने चेक को बैंक में दिया तो बैंक में अपर्याप्त बैलेंस के कारण चेक बाउंस हो गया और हमें पैसे अप्रैल 2023 में भी नहीं मिला जो डेट उन्होंने चेक में डाला था.

जब मैंने सुमित श्रीवास्तव से पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तो उन्होंने बोला कि ऑडिट का काम पूरा नहीं होने के कारण बैंक ने पैसे को नहीं ट्रांसफर किया. इसके अलावा जब जब पैसा मांगता था तो सुमित श्रीवास्तव बहाने बनाकर ताल मटोल करता रहा. बातों में उलझाया और अपने ऑफिस का पता बदल लिया. जो पता उसने वेबसाइट पर डाला है, उस पते पर आईना संस्था का कोई ऑफिस नहीं है. जो पता उन्होंने वेबसाइट पर डाला है, उस जगह के बारे में पता नहीं चल पा रहा. फिल्म और टेलीविजन से जुड़े होने का दवा करने वाली आईना संस्था की आड़ में उसके संचालक  सुमित श्रीवास्तव ने दर्जनों संस्थाओं से कार्य कराकर उन्हें भुगतान नहीं किया. 


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