प्रयागराज: नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डाॅ. हिमांशु शेखर सिंह के निर्देशन एवं विभाग के प्राध्यापकों डाॅ. ममता मिश्रा, डाॅ. विष्णु प्रसाद शुक्ल, डाॅ. मंजू शुक्ला, डाॅ. भूपनारायण एवं डाॅ. आलोक विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में परास्नातक हिन्दी के विद्यार्थियों के लिए वाराणसी के विभिन्न साहित्यिक एवं धार्मिक स्थलों के भ्रमण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके अन्तर्गत सर्वप्रथम विद्यार्थियों ने कबीर चौरा मठ का भ्रमण किया।यहाँ पर उन्हें कबीर साहब की झोपड़ी और नीरू-नीमा का टीला एवं कबीर के जीवन से जुड़ी वस्तुओं, जैसे- उनके जूते, चरखा और कबीर चबूतरा आदि देखने का अवसर प्राप्त हुआ। इसके पश्चात् विद्यार्थियों को नागरी प्रचारिणी सभा काशी का भ्रमण कराया गया। यहाँ पर विद्यार्थियों ने विभिन्न साहित्यिक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बन्धित पुस्तकों का अवलोकन किया। तदुपरांत  विद्यार्थियों ने भारतेन्दु भवन का भ्रमण किया।यहाँ पर विद्यार्थियों को भारतेन्दु जी के जीवन से जुड़ी कई वस्तुओं को देखने का अवसर प्राप्त हुआ। भारतेन्दु जी के वंशज श्री दीपेश चन्द्र चौधरी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित कर अनेक संस्मरण सुनाए।

      इसी क्रम में विद्यार्थी बनारस के श्री मठ (पंचगंगा घाट) गए, जो कि स्वामी रामानंद की तपस्थली है। यहाँ पर उन्होंने रामानंद जी की चरण पादुका, ध्यान स्थल के साथ-साथ कबीर व्याख्यान मुद्रा और तुलसीदास जी के ग्रन्थ के साथ ही उनकी प्रतिमाओं को देखा और इसके सन्दर्भ में विभिन्न जानकारियाँ अर्जित कीं।इसी क्रम में विद्यार्थियों ने  संकट मोचन हनुमान मन्दिर का भ्रमण किया, जहांँ पर वो इसके महत्व से अवगत हुए। अन्त में; विद्यार्थी बीएचयू परिसर स्थित विश्वनाथ मन्दिर का दर्शन करते हुए पुनः प्रयागराज की ओर प्रस्थान किए। इस शैक्षणिक भ्रमण में कबीरमठ के विवेक दास आचार्य (महंत- मूलगादी), डॉ. व्योमेश शुक्ल (प्रधानमंत्री- नागरी प्रचारिणी सभा), दीपेश चन्द्र चौधरी (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के वंशज), स्वामी राघवदास जी (छोटे आचार्य- श्रीमठ), शिवकरन सिंह (मंदिर व्यवस्थापक- संकट मोचन मंदिर) तथा प्रो. श्रद्धा सिंह (बीएऊ) का विशेष सहयोग सहयोग प्राप्त हुआ। 

इस अवसर पर वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने भी ऑनलाइन विद्यार्थियों को सम्बोधित किया। उन्होंने सबका स्वागत करते हुए कहा कि बनारस घूमने के साथ ही महसूस करने का शहर है। यहाँ का कण-कण शंकर है, जिसे देवस्थानों के साथ ही यहाँ की जीवनशैली में देखा जा सकता है।